क्या जीवन एक जुआ है जिसे हम भाग्य के अनुसार जीते हैं या यह हमारे कार्यों का फल है? यह एक बहस रही है जो सदियों से चल रही है, और अभी तक इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं मिला है। कुछ लोगों का मानना है कि हमारा जीवन पूरी तरह से भाग्य पर निर्भर करता है, और हम केवल उस धारा के साथ बहने की कोशिश कर सकते हैं।